मैं एक बार फिर आपको बधाई देना चाहती हूँ की आपने इस देश की मन की बात सुनी और मेरे अनशन के 10वे दिन देश को एक ऐतिहासिक अध्यादेश दिया जिससे छोटे बच्चों के बलात्कारियों को फांसी की सज़ा दी जायेगी। मैं इस पहल के लिए हमेशा आपकी आभारी रहूंगी।
इस मुद्दे पर कानून बनना ज़रूरी था लेकिन अब सब से बड़ी चुनौती इस कानून को ठीक से लागू करने की है। हमें देश में ऐसा कड़ा सिस्टम बनाना होगा जिसमें बच्चों के बलात्कारियों को कतई बख्शा नही जाएगा। दोषी पाए जाने पर अपराधी को हर हाल में और तुरंत सज़ा दी जाये। इसके लिए देश भर की पुलिस को सदृढ़ करना और फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट बनाना बहुत ज़रूरी है। मुझे खुशी है की आपकी कैबिनेट ने मेरे अनशन के 10वे दिन हमारी इस मांग - देश भर में फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट्स की नियुक्ति एवम पुलिस के संसाधन बढाने - को भी माना और कहा कि ये काम पूरे देश में 3 महीने के अंदर किया जाएगा।
आपके इन कदम को देख कर ही मैने अपना अनिश्चितकालीन अनशन 10वे दिन तोड़ा था। अभी उच्चत्तम न्यायालय ने भी न्यायालयों को बच्चों के बलात्कार के केस में 6 महीने में दोषियों को सज़ा देने का आदेश दिया है। इसके लिए पूरा देश सुप्रीम कोर्ट का आभारी है।
इस पत्र के द्वारा मैं आपसे निवेदन करती हूँ की अगले 3 महीने में देश भर में नए फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट्स बनाने और पुलिस की कार्यशैली सदृढ़ करने के लिए हम सब को रात दिन मेहनत करके मिशन मोड पर काम करना होगा। मेरा सुझाव है कि हर राज्य में एक स्पेशल टास्क फोर्स गठित हो जिसमें भारत सरकार, राज्य सरकार एवं जुडिशरी के सबसे वरिष्ठ प्रतिनिधि हों जो अगले 15 दिन में इस कार्य को क्रियान्वित करने की अपने राज्य की रूप रेखा तय करें। क्योंकि दिल्ली एक विशेष राज्य है, मैं आपसे निवेदन करूँगी की दिल्ली के स्पेशल टास्क फोर्स में केंद्रीय गृह मंत्री, चीफ जस्टिस दिल्ली हाई कोर्ट, उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री, पुलिस कमिश्नर एवं दिल्ली महिला आयोग हो और अगले 15 दिन में इनकी बैठक बुलाई जाए।
जैसा कि मैं आपको पहले भी बता चुकी हूँ, दिल्ली पुलिस के पास पिछले 10 साल से 66,000 पुलिस बल की भारी कमी है। साथ ही पिछले 5 साल से केंद्र सरकार के उपयुक्त वित्त न देने के कारण दिल्ली में नए फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट्स नही बन पा रहे हैं। हमारी तपस्या से इस बार देश में कानून तो बन गया पर जब तक हम संसाधन नही बढ़ाएंगे, इस कानून का जमीनी रूप से फायदा नही हो पायेगा।
इसलिए आपसे हाथ जोड़ कर विनती है कि अविलम्ब इस कार्य को क्रियान्वित करें।
साथ ही मैं एक बात को ले कर बहुत चिंतित हूँ। मैं देख रही हूँ कि आज कल राजनेता और सरकार में बैठे हुए लोग बलात्कार पर काफी असंवेदनशील बयानबाजी कर रहे हैं। मुझे लगता है कि यह घोर निंदनीय है और इससे पूरे देश की निर्भयाओं का मनोबल टूटता है। मैं आपसे निवेदन करती हूँ कि जो कोई भी इस तरह की बयानबाजी करे, उसके खिलाफ आप सख्त से सख्त एक्शन लें जिससे देश को पीछे धकेलने की इनकी मानसिकता पे अंकुश लगे।
एक और बहुत चिंता और डर की बात है जिससे कहते हुए मैं बहुत पीड़ा महसूस कर रही हूँ। आज कल बच्चों के रेप के ऊपर एक घटिया हिन्दू मुस्लिम राजनीति होनी शुरू हो गई है। पहले ऐसा कभी नही होता था। पता नही क्या हो रहा है पर 8 साल की कठुआ की बच्ची और 10 साल की दिल्ली की बच्ची का धर्म बहुत बड़ा मुद्दा हो गया है। इस तरह की सम्प्रदायिक सोच जबरदस्ती सस्ती राजनीति चमकाने के लिए पनपाई जा रही है। क्या छोटी बच्चियों के खून का रंग भगवा या हरा हो सकता है? ऐसी सोच एक बड़ी साजिश की तरह देश में तीव्र गति से फैलाई जा रही है। आप देश के प्रधान सेवक हैं और इसके नाते मैं आपसे गुज़ारिश करती हूँ कि आप इस में हस्तक्षेप करें और देश में कड़ा सन्देश दें। बच्चों के साथ हुए दुष्कर्म जैसे अपराध के खिलाफ सब को एकजुट होकर लड़ना चाहिए। उसको धर्म और जाति से बिल्कुल नही जोड़ा जाना चाहिए। ऐसा करने वालो को सख्त सजा देनी चाहिए।
मैं दिन रात बस इन्ही मुद्दों के बारे में सोचती हूं और बलात्कार जैसे घिनोने अपराध से लड़ने की चेष्टा करती हूँ। अपने 2.5 साल के कार्यकाल में मैने कई छोटी निर्भयाओं का खून पोंछा है। उनकी दर्द भरी चीखों ने ही मुझे इतनी शक्ति दी कि मैं अनिश्चितकालीन अनशन कर पाई। मैं आपसे मिलके इन सब मुद्दों पे चर्चा करना चाहती हूँ। आशा करती हूँ आप अपनी इस बेटी को निराश नही करेंगे,
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