दिल्ली महिला आयोग ने झारखण्ड की एक 16 साल की बच्ची को एक घर से छुड़ाया !
दिल्ली: दिल्ली महिला आयोग ने दिल्ली पुलिस और अपर जिलाधिकारी की मदद से झारखण्ड की एक 16 साल की लड़की को एक घर से मुक्त कराया .दिल्ली महिला आयोग को सूचना मिली कि किंग्सवे कैम्प में एक घर में एक नाबालिग बच्ची से काम कराया जाता है . इस सूचना के आधार पर दिल्ली महिला आयोग ने एक टीम वहां पहुंची| टीम ने दिल्ली पुलिस को भी वहाँ बुला लिया !
शुरू में मकान मालकिन ने आयोग और पुलिस की टीम को घर में प्रवेश नही करने दिया। मगर पुलिस द्वारा दरवाजा तोड़ने की धमकी देने के बाद मकान मालकिन ने दरवाजा खोल दिया . जब आयोग, दिल्ली पुलिस और अपर जिलाधिकारी मकान में अन्दर गए तो उन्हें एक नाबालिग लड़की मिली .बच्ची बहुत सहमी हुई थी और डर की वजह से कुछ नहीं बता पा रही थ !
बच्ची की काउन्सलिंग करने पर उसने बताया कि वह झारखण्ड में नीरारा के बड़ा बांस गांव की रहने वाली है .उसने बताया कि उसके माता पिता का वचपन में ही देहांत हो गया था और उसको उसकी नानी ने पाला था .लड़की ने बताया कि एक प्लेसमेंट एजेंसी की एजेंट उसको 3 साल पहले दिल्ली लेकर आई थी और उसको 3000 रुपये प्रतिमाह पर इस घर में काम करने के लिए रखा था !
उसने बताया की वह तीन साल से इस घर में काम कर रही है मगर उसको अब तक कोई वेतन नहीं मिला था। उसको बीमार होने पर भी काम करवाया जाता था और दबाई भी नहीं दिलाई जाती थी !
उसको घर में बंधक बनाकर रखा हुआ था और उसे घर से बाहर निकलने पर भी पाबन्दी थी
पुलिस ने इस मामले में जेजे एक्ट, बाल मजदूरी क़ानून और बंधुआ मजदूरी क़ानून की उचित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है और लड़की को शेल्टर होम भेज दिया गया है !
दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल जयहिंद ने कहा, "दिल्ली में प्लेसमेंट एजेंसी दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर मानव तस्करी का रैकेट चला रही हैं। में सभी जिम्मेदार लोगों से अपील करती हूँ कि दिल्ली में प्लेसमेंट एजेंसी को नियंत्रित किया जाए। बाल कल्याण समिति तुरंत इस बच्ची को इसकी बची हुई तनख्वाह दिलाये। बच्ची से काम करवाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिए !
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